कृषि विकास, शिक्षा, अनुसंधान और आदिवासी सशक्तिकरण को मिलेगा नया आयाम
नई दिल्ली | शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक विकास के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) एवं मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (MIET) ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मेरठ तथा पश्चिम बंगाल के हुगली जनपद स्थित तपशील जाति आदिवासी प्राक्तन सैनिक कृषि विकास शिल्प केंद्र के मध्य एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह संस्था भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है। एमओयू हस्ताक्षर समारोह का आयोजन कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में किया गया।
समझौता ज्ञापन पर एमआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के वाइस चेयरमैन श्री पुनीत अग्रवाल तथा तपशील जाति आदिवासी प्राक्तन सैनिक कृषि विकास शिल्प केंद्र के सचिव श्री सौमेन कोले ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना, कौशल विकास, सतत कृषि, उद्यमिता तथा ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के समग्र और समावेशी विकास के लिए संयुक्त प्रयास करना है।
इस अवसर पर एमआईईटी ग्रुप के ग्रुप डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार मिश्रा ने कहा कि यह साझेदारी शैक्षणिक संस्थानों और जमीनी स्तर पर कार्यरत संगठनों के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करेगी। उन्होंने जानकारी दी कि एमओयू के अंतर्गत कृषि एवं उससे संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार तथा ज्ञान के आदान–प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, फील्ड एक्सपोज़र और व्यवहारिक शिक्षण के प्रभावी अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
कार्यक्रम में एमआईईटी ग्रुप के वाइस चेयरमैन श्री पुनीत अग्रवाल, ग्रुप डीन डॉ. सुनील कुमार मिश्रा, श्री सुशील कुमार शर्मा, मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्राचार्य डॉ. हिमांशु शर्मा तथा सुश्री तनुश्री जैन भी उपस्थित रहे।
वहीं तपशील जाति आदिवासी प्राक्तन सैनिक कृषि विकास शिल्प केंद्र की ओर से उपाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र कुमार, राष्ट्रीय सलाहकार समिति के सदस्य एवं परियोजना निदेशक श्री मृदुल ताराफदर, मुख्य वित्त अधिकारी श्री पवन कुमार झा, प्रशासन एवं संचालन प्रमुख श्री जितेंद्र कुमार सहित अन्य पदाधिकारी भी समारोह में मौजूद रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसरों के सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएं, छात्र इंटर्नशिप तथा आदिवासी एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न पहलों पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। यह समझौता शिक्षा और नवाचार के माध्यम से अकादमिक संस्थानों और समुदाय के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सतत एवं समावेशी विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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