शिक्षकों को मिली नवीन शिक्षण पद्धतियों और मूल्यांकन की व्यावहारिक समझ
मेरठ। दिल्ली बाइपास स्थित वेंकटेश्वरा वर्ल्ड स्कूल में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क—एनसीएफ) पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यालय के 60 से अधिक अध्यापक एवं अध्यापिकाओं ने सक्रिय सहभागिता की। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को नई शैक्षणिक अवधारणाओं, शिक्षण पद्धतियों तथा मूल्यांकन प्रक्रिया की गहन समझ प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या संजया वालिया द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यशाला की मुख्य वक्ता सुश्री चंचल मित्तल एवं सुश्री वंदना पांडे का स्वागत करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान एवं अनुभव से शिक्षकों को अवगत कराया।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में चंचल मित्तल ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एनसीएफ का मुख्य उद्देश्य बिना मानसिक बोझ के शिक्षा को प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में रटने की प्रवृत्ति को समाप्त कर बच्चों के समग्र विकास, समझ, सृजनात्मकता और तार्किक सोच को केंद्र में रखा गया है।
इसके पश्चात वंदना पांडे ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि एनसीएफ का उद्देश्य किताबी ज्ञान को वास्तविक जीवन से जोड़ना तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक रोचक, उपयोगी और व्यवहारिक बनाना है। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में कौशल आधारित शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे विद्यार्थी आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यशाला के समापन सत्र में विद्यालय की चेयरपर्सन डॉ. अंजुल गिरि ने कहा कि पाठ्यक्रम में समय-समय पर आवश्यक बदलाव किए जाने से बच्चों के लिए सीखना सरल और आनंददायक बनता है। उन्होंने शिक्षकों से नवीन शिक्षण विधियों को अपनाने का आह्वान किया।
अंत में प्रधानाचार्या संजया वालिया ने वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एनसीएफ आधारित गतिविधियों से बच्चों की भावनात्मक समझ, सहयोग की भावना और समूह में कार्य करने की क्षमता का विकास होता है। इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को मूल्यांकन की बेहतर समझ प्राप्त हुई तथा यह जाना गया कि बच्चों की स्मरण शक्ति, रचनात्मक सोच और व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से कैसे विकसित किया जा सकता है।

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