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Monday, March 20, 2023

सेल्फी के बजाय किसी पीड़ित का दर्द खीचने का प्रयास करे, इंसान की छोडो, खुद भगवान आपको वेलडन कहेगा- डॉ राजीव त्यागी

 वेंक्टेश्वरा में शानदार तरीके से मनाया इन्टरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस

हवा में रंग बिरंगे गुब्बारे उड़ाकर, एक दूसरे को फूल भेट कर एवं भण्डारा आयोजित शानदार तरीके से मनाया गया विश्व प्रसन्नता दिवस 

खीचना ही है तो सेल्फी के बजाय किसी पीड़ित का दर्द खीचने का प्रयास करे, इंसान की छोडो, खुद भगवान आपको वेलडन कहेगा- डॉ राजीव त्यागी, प्रतिकुलाधिपति, श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान



मेरठ। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान में धूमधाम से ’’इन्टरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस’’ मनाया गया, जिसमें संस्थान प्रबन्धन एवं स्टॉफ ने रंग बिरंगे गुब्बारे उड़ाकर एक दूसरे को फूल भेटकर एवं भण्डारा लगाकर खुशी का इजहार किया। इस अवसर पर समूह चेयरमैन डॉ सुधीर गिरि ने कहा कि हमे प्रसन्नता बाहृय चीजो से कभी भी मिल ही नही सकती, सदैव हर परिस्थिति में प्रसन्न रहने का एकमात्र तरीका स्वयं के अर्न्तमन को संतुष्ट करना है।

श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान के डॉ सीवी रमन सभागार में इन्टरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारम्भ चेयरमैन डॉ सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डॉ राजीव त्यागी, सीईओ अजय श्रीवास्तव एवं कुलपति डॉ0 राकेश यादव आदि ने सरस्वती माँ की प्रतिमा के सन्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया। 

अपने सम्बोधन में समूह चेयरमैन डॉ सुधीर गिरि ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने कहा कि मै भीतर गया, तो मै भी तर गया, मलतब सच्ची एवं स्थायी खुशी पाने के लिए आपको बाहृय/भौतिक दुनिया छोड़कर अपने अन्दर जाना होगा। उन्होने आगे कहा कि किसी एक आदमी की मदद करके आप पूरी दुनिया बदल नहीं सकते, लेकिन आपका यह प्रयास उस व्यक्ति की पूरी दुनिया बदल सकता है। इस अवसर पर उन्होने गरीब लोगो के लिए संस्थान परिसर में अनवरत चलने वाले भण्डारे का भी शुभारम्भ किया। 

प्रतिकुलाधिपति डॉ राजीव त्यागी ने कहा कि स्थायी खुशी एक दिन मनाने भर से नहीं, बल्कि प्रतिदिन ईश्वर के प्रति कृतज्ञता एवं अपने काम को शत्-प्रतिशत ईमानदारी से करते हुए समाज के अन्तिम छोर पर खड़े हुए व्यक्ति की मदद करने से मिलती है। उन्होने महात्मा बुद्ध की एक घटना का दृष्टान्त देकर जिसके एक शिष्य द्वारा उनसे पूछा जाता है कि ’’उत्सव मनाने का सबसे श्रेष्ठ दिन कौन सा है, तो बुद्ध कहते है कि मृत्यु से एक दिन पूर्व। शिष्य कहता है कि किसी को भी नहीं पता होता कि मेरी मृत्यु कब होगी, तो बुद्ध कहते है इसीलिए हर दिन को अपना आखिरी मानते हुए उसे उत्सव के रूप में मनाते हुए प्रतिदिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करें।

कार्यक्रम को सीईओ अजय श्रीवास्तव, कुलपति डॉ राकेश यादव एवं कुलसचिव डॉ पीयूष पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर मेरठ परिसर निदेशक प्रताप सिंह, अलका सिंह, दीपक, ब्रजपाल, डॉ राजेश सिंह, नसीम अहमद, एमए चौधरी, विकास भाटिया, मारूफ चौधरी, विक्रांत चौधरी, विशाल शर्मा, एसएस बघेल, अरूण गोस्वामी,  अभिषेक, डॉ एसएन साहू, डॉ सीपी कुशवाहा, डॉ ऐना एरिक ब्राउन, डॉ विवेक सचान, डॉ रमेश चौधरी, डॉ राजवर्द्धन, डॉ योगेश्वर शर्मा, स्वाति सिंह, नीतूश्री पाल, प्रीतपाल एवं मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे।

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