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Monday, August 21, 2023

इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज में 31वी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की कार्यशाला हुई

साहिबाबाद। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार और नोडल एजेन्सी इंडियन साइंस कम्यूनिकेशन सोसायटी के संयुक्त तत्वाधान में 31वी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला उच्च स्तरीय मानकों से जिला समन्वयकों एवं जिला एकेडमिक समन्वयकों को आत्म साक्षात करने के उद्देश्य से इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज, साहिबाबाद, गाजियाबाद में आयोजित हुई।

कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि परीक्षा नियंत्रक सीबीएसई डाॅ संयम भारद्वाज, नोडल अधिकारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश वी.के.सिंह, पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य समन्वयक दीपक शर्मा, निदेशक डॉ.अजय कुमार ने संयुक्त रूप ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। 

कार्यशाला में मुख्य वक्ता श्रेयांश मंडलोई, डॉ आंचल अमिताभ, प्रो. एमए अंसारी, डॉ नेहा राणा नेशनल इवेल्यूएशन कमेटी, डॉ आलोक कुमार गोयल, डॉ नफीस अहमद प्रिंसिपल साइंटिस्ट, डायरेक्टर डॉ अजय कुमार, मीनाक्षी ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। कार्यशाला मेें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 38 जिलों के 100 से अधिक जिला समन्वयकों एवं जिला एकेडमिक समन्वयकों ने प्रतिभाग किया। 

नोडल अधिकारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश वीके सिंह ने बताया कि गत वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मुख्य विषय स्वास्थ्य और कल्याण के लिए परतंत्र को समझना हैं। 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य समन्वयक दीपक शर्मा ने कार्यशाला में अवगत कराया कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस,10 से 17 आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक राष्ट्रव्यापी महत्वपूर्ण व अभिनव कार्यक्रम हैं। जिसमें बच्चे मुख्य विषय पर आधारित स्थानीय समस्या पर अनुसंधान प्रक्रिया से प्रोजेक्ट तैयार करते हैं। बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से देश भर के विद्यालयों में वर्ष 1993 से अनवरत इसका आयोजन किया जा रहा हैं। इस वर्ष हम 31 वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। इस आयोजन का सफर 10 से 14 और 14 से 17 आयु वर्ग में दो-दो विद्यार्थियों के समूह में स्कूल स्तर से शुरू होकर ब्लाक स्तर, जनपद, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक जाता हैं। 

सहारनपुर के जिला समन्वयक अम्ब्रीश कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विज्ञान प्रतिभाओं की खोज करना तथा बच्चों में वैज्ञानिक चेतना का अंकुरण कर उन्हे स्थानिय परीवेश में तार्किक वैज्ञानिक खोज की दिशा में आगे बढ़ाना है।

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