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Thursday, March 26, 2026

आईपीईसी में इंडो-रशियन संगम: शिक्षा, खुशहाली और वैश्विक सहयोग पर जोर





साहिबाबादइंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज (IPEC) में भारत और रूस के बीच शैक्षणिक व सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने की पहल के तहत इंडो-रशियन प्रतिनिधिमंडल का भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, खुशहाली और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहीं प्रमुख हस्तियां
प्रतिनिधिमंडल में मरीना वोल्कोवा (संस्थापक एवं अध्यक्ष, इंटरनेशनल चैरिटेबल फाउंडेशन ‘गिव लव टू द वर्ल्ड’), एलेना (चेयरमैन, इंडियन रशियन कम्पैट्रियट्स सोसायटी) तथा टीम सदस्य एकातेरिना और झन्ना सेमेनोवा शामिल रहीं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर दिया जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ इंटरनेशनल रिलेशंस के वाइस प्रेसिडेंट विभूति शंकर के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संस्थान अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शैक्षणिक आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

शिक्षा में हैप्पीनेस कोटिएंट पर बल
इस अवसर पर आईईपीसी के वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल ने अपने संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में मानवीय मूल्यों और हैप्पीनेस कोटिएंट के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान के समग्र विकास के लिए भावनात्मक संतुलन और पेशेवर उत्कृष्टता का समन्वय जरूरी है, जिससे सकारात्मक और समावेशी कार्य संस्कृति का निर्माण होता है।

महिलाओं के अधिकार और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के अधिकार, लैंगिक असमानता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर एक विचार-विमर्श सत्र भी आयोजित किया गया। इस चर्चा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए शोध एवं सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

संयुक्त शोध और शैक्षणिक सहयोग पर हुई बातचीत
इस मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. डी.के. शर्मा, डीन एकेडमिक्स डॉ. अमित जैन, डीन सीएस डॉ. सुनीता यादव तथा डीन स्टूडेंट वेलफेयर एवं आईक्यूएसी डॉ. मीनाक्षी शर्मा सहित विभिन्न विभागाध्यक्षों ने प्रतिनिधिमंडल के साथ शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम के दौरान संयुक्त शोध परियोजनाओं, ज्ञान के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के अवसरों पर भी विचार किया गया। संस्थान प्रबंधन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से भारत-रूस के बीच शैक्षणिक सहयोग को नई गति मिलेगी और विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलेंगे।

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