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Thursday, July 2, 2026

मेरठ बनेगा साइबर सुरक्षा का नया हब: सी-डैक के सहयोग से एमआईईटी में खुला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

- एआई आधारित साइबर हमलों से निपटने के लिए तैयार होंगे विशेषज्ञ, अनुसंधान और प्रशिक्षण को मिलेगी नई दिशा

मेरठ। भारत की डिजिटल सुरक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक), नई दिल्ली के सहयोग से स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन साइबर सिक्योरिटी का भव्य शुभारंभ किया गया। यह अत्याधुनिक केंद्र साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उच्च स्तरीय अनुसंधान, विशेषज्ञ प्रशिक्षण, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा उभरते साइबर खतरों के प्रभावी समाधान विकसित करने का प्रमुख केंद्र बनेगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सी-डैक, नई दिल्ली के सेंटर हेड एवं वैज्ञानिक-जी जितेंद्र सिंह रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईईटी के चेयरमैन विष्णु शरण ने की। इस अवसर पर सी-डैक के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज साइबर सुरक्षा केवल सूचना प्रौद्योगिकी का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और डिजिटल विश्वास की आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, परिवहन और सरकारी सेवाओं जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं। ऐसे में सी-डैक और एमआईईटी का यह संयुक्त प्रयास देश के लिए विश्वस्तरीय साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एमआईईटी के वाइस चेयरमैन गौरव अग्रवाल ने कहा कि यह सेंटर उद्योग और अकादमिक जगत के बीच की दूरी को कम करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा पर अनुसंधान को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि रैनसमवेयर, एआई आधारित फ़िशिंग और राज्य प्रायोजित साइबर हमलों जैसी बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
सी-डैक के वैज्ञानिक-ई एवं समूह प्रमुख अपूर्व कोहली ने बताया कि सी-डैक कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर उन्नत तकनीकों पर शोध कर रहा है और एमआईईटी का यह केंद्र भी भविष्य में वैश्विक स्तर की अनुसंधान परियोजनाओं का हिस्सा बनेगा। वहीं डॉ. ऋचा चौधरी ने एसीटीएस कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित विभिन्न उन्नत साइबर सुरक्षा एवं सूचना प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रमों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को इनसे जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
सी-डैक के वरिष्ठ परियोजना अभियंता अरुण कुमार ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से नेटवर्क सिक्योरिटी, वेब एप्लीकेशन सिक्योरिटी, इंसिडेंट रिस्पॉन्स, रिस्क मैनेजमेंट, पेनिट्रेशन टेस्टिंग और वल्नरेबिलिटी असेसमेंट जैसे अत्याधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

सी डैक के वरिष्ठ सलाहकार अरविंद कुमार ने मोबाइल एप्लीकेशन सुरक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐप के कोड, डिज़ाइन और कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल में मौजूद कमजोरियां साइबर अपराधियों के लिए अवसर बन जाती हैं। इन जोखिमों से बचने के लिए सुरक्षित कोडिंग, मजबूत एन्क्रिप्शन और नियमित सुरक्षा परीक्षण अत्यंत आवश्यक हैं।

एमआईईटी के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस.के. सिंह ने बताया कि संस्थान अगले तीन से चार वर्षों में इस सेंटर को साइबर सुरक्षा अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत विशेष प्रमाणन कार्यक्रम, ट्रेन-द-ट्रेनर पहल तथा संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित की जाएंगी।

कार्यक्रम में एसपीओसी (साइबर सिक्योरिटी) प्रो. (डॉ.) बृजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि साइबर सुरक्षा आज राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का अभिन्न आधार है। उन्होंने बताया कि यह सेंटर अत्याधुनिक हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर से लैस होगा, जहां वल्नरेबिलिटी असेसमेंट, थ्रेट इंटेलिजेंस, साइबर डिफेंस, अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र देश को सक्षम साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ देने के साथ डिजिटल भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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