साहिबाबाद। औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 स्थित इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज (आईपीईसी) में गुरुवार को ‘मानसिक शक्ति’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘अवेयरनेस टू एक्शन: एम्पावरिंग यंग माइंड्स फॉर इनक्लूसिवनेस’ थीम पर हुए कार्यक्रम में युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनने के साथ-साथ लैंगिक समानता, सम्मान और संवेदनशील व्यवहार के लिए जागरूक किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR), राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और डॉ. अर्चिका फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम को ‘उच्च शिक्षा में युवाओं की लैंगिक सोच और व्यवहार का अध्ययन: एआई पर आधारित दीर्घकालिक शोध’ से भी जोड़ा गया है। इसका मकसद युवाओं की सोच और व्यवहार को समझना और उन्हें जागरूकता से आगे बढ़कर सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करना है।
महिलाओं के अधिकार और सम्मान पर जोर
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. अर्चिका दीदी, चेयरपर्सन, डॉ. अर्चिका फाउंडेशन रहीं। उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस राजेश टंडन और स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन की डीसीपी नेहा यादव भी मौजूद रहीं। राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
जस्टिस राजेश टंडन ने कहा कि महिलाओं को आजीविका, सम्मान और सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार मिलना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल बनाने पर जोर दिया।
रोज की छोटी आदतों से मजबूत होगी मानसिक शक्ति
डीसीपी नेहा यादव ने विद्यार्थियों को तनाव से निपटने के आसान तरीके बताए। उन्होंने गहरी सांस लेने, पर्याप्त नींद, ध्यान, व्यायाम, पढ़ने और अपने विचार लिखने जैसी आदतों को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रोजाना की छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें मानसिक मजबूती बढ़ाने में मदद करती हैं।
डॉ. अर्चिका दीदी ने कहा कि युवाओं को पढ़ाई, करियर और निजी जीवन में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मानसिक रूप से मजबूत रहना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को ध्यान की प्रक्रिया समझाई और उसका अभ्यास भी कराया। साथ ही भेदभाव, गलत टिप्पणियों और किसी को समाज से अलग करने वाली सोच से बचने की अपील की।
‘जागरूकता तभी कामयाब, जब व्यवहार में दिखे बदलाव’
आईपीईसी की उपाध्यक्ष ने कहा कि किसी विषय की जानकारी होना ही पर्याप्त नहीं है। जागरूकता तब सार्थक होती है, जब वह समझ, सहानुभूति और सकारात्मक कार्रवाई में बदलती है। उन्होंने कहा कि युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि आज के बदलाव के वाहक हैं। उनमें आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना जरूरी है।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. पूजा त्रिपाठी ने कहा कि युवाओं को केवल तकनीकी शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सही-गलत की पहचान करने, रूढ़ियों पर सवाल उठाने, सम्मानजनक तरीके से संवाद करने और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार और फैसले आज ही समाज को प्रभावित कर रहे हैं।
समापन पर वाइस प्रेसिडेंट-फंडेड प्रोजेक्ट विभूति शंकर ने कार्यक्रम को युवाओं के लिए जरूरी पहल बताया। उन्होंने डॉ. अर्चिका फाउंडेशन और सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार जताया।
कार्यक्रम में आईपीईसी के वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल, डीन स्टूडेंट वेलफेयर अमित जैन, प्राचार्य, शिक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


No comments:
Post a Comment