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Wednesday, December 14, 2022

मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में विश्व ऊर्जा संरक्षण दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन

ऊर्जा संरक्षण के लिए हमें मशीनों पर निर्भरता कम करनी होगी : आयुष पीयूष गोयल

ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है: राजीव माहेश्वरी



मेरठ। पर्यावरण एवं स्वच्छता क्लब के सहयोग से परतापुर बाईपास स्थित मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में विश्व ऊर्जा संरक्षण दिवस पर निबंध प्रतियोगिता एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। एमआईटी में एनएसएस यूनिट और उन्नत भारत अभियान के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि अधीक्षण अभियंता तकनीकी यूपीपीसीएल राजीव महेश्वरी, पर्यावरण एवं स्वच्छता क्लब के निदेशक आयुष एवं पियूष गोयल, वरिष्ठ समाजसेवी विपुल सिंघल, प्राचार्य डॉ हिमांशु शर्मा और मीडिया मैनेजर अजय चौधरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। ऊर्जा संरक्षण विषय पर हुए निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर तान्या त्यागी, दूसरे स्थान पर सहज मिश्रा और तीसरे स्थान पर मुस्कान भारती रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में तान्या शर्मा और डॉ हेमा नेगी का योगदान रहा।




क्लब निदेशक आयुष गोयल पीयूष गोयल ने कहा की ऊर्जा संरक्षण के लिए हमें मशीनों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। चूँकि मशीनों के संचालन में ऊर्जा की खपत बहुत अधिक होती है, इसलिए ऊर्जा भंडार कम होते जा रहे हैं। ऐसे में हमें अपने काम करने के लिए अपनी शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए और मशीनों पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए। जिन कार्यों के लिए हमें सहयोग नहीं मिलता उन्हें करने के लिए हमें केवल मशीनों की सहायता लेनी चाहिए।



अधीक्षण अभियंता तकनीकी यूपीपीसीएल राजीव माहेश्वरी ने कहा की हमें ऊर्जा संरक्षण के नए उपायों की तलाश करते रहनी चाहिए और ऊर्जा के नए संसाधनों को विकसित करने पर जोर देना चाहिए। इस क्षेत्र में हमारे वैज्ञानिकों को बायोगैस जैसे बेहतर विकल्प भी मिले हैं हालांकि अभी और भी नए संसाधनों के विकास की आवश्यकता है। हमें ऊर्जा संरक्षण के विभिन्न उपायों को अपनाना चाहिए तथा अपने आस-पड़ोस और दुनिया भर के लोगों को ऊर्जा संरक्षण के उपायों के बारे में बताना चाहिए तथा उन्हें ऊर्जा संरक्षण को लेकर जागरूक करना चाहिए। ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है और हमें इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाना चाहिए। 


वरिष्ठ समाजसेवी विपुल सिंघल ने कहा की ब्रह्मांड में छोटे से छोटा काम करने के लिए भी कार्य करने की क्षमता यानी कि ऊर्जा की आवश्यकता होती है। बिना ऊर्जा के ब्रह्मांड का कोई भी कार्य संपन्न नहीं हो सकता। आज का मानव मशीनों पर पूरी तरह से आश्रित हो गया है जिसके कारण ऊर्जा की खपत बढ़ गई है। अगर हम मशीनों पर पूर्ण आश्रित होना छोड़ दें और छोटे-मोटे कामों को खुद से निपटाना शुरू कर दें तो हम ऊर्जा की भारी बचत कर सकते हैं।

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