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Thursday, December 22, 2022

इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के बुनियादी ढांचे की सामान्य कमी चिंता का विषय : विकास गुप्ता

  • एमआईईटी में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
  • भारत में 2030 तक 70 फ़ीसदी व्हीकल इलेक्ट्रिक हो चुके होंगे : सुजॉय चौरसिया



मेरठ। एमआईईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ई अश्व आटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद के फाउंडर और सीईओ विकास गुप्ता, ई ऑक्सीजन आटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड न्यू दिल्ली के फाउंडर सुजॉय चौरसिया, विभागध्यक्ष डॉ शैलेंद्र त्यागी, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर शाहीन हसन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।



ई अश्व आटोमोटिव के सीईओ और फाउंडर विकास गुप्ता ने कहा मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज की स्कीम हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना एवं उनका निर्माण करना और सरकारी अन्य योजनाओं के जरिए इलेक्ट्रिक वाहन के बिजनेस को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। ताकि इस फिल्ड में सस्ती कीमतों पर बेहतर प्रोडक्ट तैयार करने में मदद मिल सके। इससे लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। यही कारण है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। हालांकि, परफॉर्मेंस के संबंध में उम्मीदें अधिक बनी हुई हैं। चूंकि इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के बुनियादी ढांचे की सामान्य कमी के बारे में चिंता बनी हुई है, इसलिए सरकार को इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने की जरूरत है। 



ई ऑक्सीजन आटोमोटिव के फाउंडर सुजॉय चौरसिया ने कहा नीति आयोग की "भारत की विद्युत गतिशीलता परिवर्तन" रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल गाड़ियां, 40 फीसदी बस, और 80 फीसदी तक दो पहिया और तीन पहिया वाहन इलेक्ट्रिक हो चुके होंगे। इससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 846 मिलियन टन की कमी आएगी। वहीं इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चलते लगभग 474 मिलियन टन तेल की बचत होगी जिसकी कीमत लगभग 207.33 बिलियन डॉलर होगी।



कोऑर्डिनेटर शाहीन हसन ने कहा की वैसे तो सभी को ये मालूम है कि इलेक्ट्रिक वाहन इको फ्रेंडली है, साथ ही ये आप की जेब के लिए भी बहुत फ्रेंडली साबित होता है। इलेक्ट्रिक व्हीकल सबसे ज्यादा सुविधाजनक ट्रांसपोर्ट का विकल्प है। कम लागत और इक्रो फ्रेंडली होने के बावजूद भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की ओर लोगों का इंट्रेस्ट अभी कम ही है, जिसकी बड़ी वजह इनके बारे में कम जानकारी होने को माना जा सकता है।

इस अवसर पर वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल, निदेशक डॉ बृजेश सिंह, डीन एकेडमिक डॉ भावना मलिक,विभागाध्यक्ष डॉ शैलेंद्र त्यागी, मधुर दुबे, राहुल शर्मा, पीयूष गुप्ता, अविनाश सिंह, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर शाहीन हसन आदि शिक्षक मौजूद रहे।

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