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Monday, March 11, 2024

एमआईईटी कुमाऊं में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

 256 शोधार्थियों एवं 38 वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विचार प्रस्तुत किये

शिक्षाविदों को पर्वतीय क्षेत्रों के विकास एवं विभिन्न समस्याओं के समाधान पर करे मंथन : भगत सिंह कोश्यारी


हल्द्वानी। शिक्षा नगर लमाचौर स्थित एमआईईटी कुमाऊं कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। जिसका विषय सतत विकास के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं कृषि विज्ञान रहा। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ बी एस बिष्ट, विशिष्ट अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर डी.एस रावत, उच्च शिक्षा निदेशक उत्तराखंड प्रो सी.डी सुनथा, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो ओ.पी.एस नेगी, कार्यकारी निदेशक डॉ तरुण कुमार सक्सेना, एसीआईसी देवभूमि फाउंडेशन के सीईओ डॉ कमल रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।



प्रबंध निदेशक डॉ बी एस बिष्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकास्ट) एवं उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) के सहयोग से हुआ है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 256 शोध पत्रों ने भाग लिया, जिनमें से पहले दिन 165 शोध पत्रों पर चर्चा हुई। इस दौरान कृषि, जीवन विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के शोधकर्ताओं ने शोध पत्र प्रस्तुत किए और 38 अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। 

भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उपस्थित सभी शिक्षाविदों को पर्वतीय क्षेत्रों के विकास एवं विभिन्न समस्याओं के समाधान पर मंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नई शिक्षा नीति नहीं बल्कि प्राचीन शिक्षा नीति है क्योंकि नई शिक्षा नीति में भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को वापस लाया गया है। अविद्या विज्ञान है और विद्या ज्ञान है। भौतिक जगत के जिस ज्ञान को आजकल विज्ञान कहते हैं उसी को उपनिषद में अपराविद्या के नाम से कहा गया है। अभ्युदय और भौतिकता अविद्या के पर्याय हैं। इसी प्रकार नि:श्रेयस और आध्यात्मिकता विद्या के पर्याय हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से अपील की अपनी जड़ों से कभी भी अलग नहीं होना चाहिए और हमें मातृभाषा के माध्यम से ज्ञान को ग्रहण करना चाहिए क्योंकि जो भाषा हम आसानी से बोल और समझ सकते हैं, उस भाषा में हम अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित कर सकते हैं। 

प्रो आर.पी पंत ने विभिन्न वैदिक मित्रों से गणित के फार्मूला के बारे में विस्तार से बताया। प्रोफेसर ओपी एस नेगी ने भारतीय प्रणाली में शामिल बुनियादी अनुसंधान सिद्धांतों को समझाया और उत्तराखंड में विकास के बारे में चर्चा की।

इस दौरान प्रोफेसर कमल पांडे प्रिंसिपल बाजपुर डिग्री कॉलेज, प्रोफेसर लता पांडे कुमाऊं विश्वविद्यालय, प्रोफेसर महेंद्र राणा परीक्षा नियंत्रक कुमाऊं, प्रो पीडी पंत रजिस्टर उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी, प्रोफेसर आशुतोष भट्ट, प्रोफेसर जितेंद्र पांडे, डॉ अनिता राणा, डॉ रत्ना प्रकाश डायरेक्टर पाल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, डॉ गौरव वाष्र्णेय, प्रोफेसर के.के पांडे, प्रोफेसर के सी पंत, प्रोफेसर ए.के परिहार, प्रोफेसर ओम प्रकाश आदि ने शोध पत्र एवं विचार प्रस्तुत किए।

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