वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर संगोष्ठी और जागरूकता पखवाड़ा शुरू
मेरठ। वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर ‘‘साक्षरता वृद्धि में डिजिटल एजुकेशन का महत्व’’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसी के साथ ‘‘साक्षरता जागरूकता पखवाड़ा-2025’’ का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के तहत 15 शिक्षकों के नेतृत्व में 150 छात्र-छात्राओं का दल मेरठ, मुरादाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता और जागरूकता संगोष्ठियों के माध्यम से शिक्षा के महत्व का संदेश देगा।
संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि ने कहा कि शिक्षा ही किसी भी देश की सबसे बड़ी शक्ति है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने भी शिक्षा को ‘‘शेरनी का दूध’’ बताया था, जिसका अर्थ है कि ज्ञान से ही व्यक्ति में आत्मविश्वास और शक्ति आती है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो शत-प्रतिशत साक्षरता सुनिश्चित करनी होगी।
प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी ने नई शिक्षा नीति-2020 को ऐतिहासिक बताया और कहा कि स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाएँ भारत को 2047 तक ‘‘विकसित भारत’’ बनाने में सहायक होंगी। कुलपति प्रो. कृष्णकांत दवे ने कहा कि डिजिटल लर्निंग ने साक्षरता दर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है और यह भविष्य की शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव बनेगी।
कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. पीयूष पांडेय, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. मंजरी राणा, निदेशक डॉ. प्रताप सिंह और मीडिया प्रभारी विश्वास राणा सहित कई शिक्षाविद उपस्थित रहे।

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