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Wednesday, July 22, 2026

सीसीएसयू का 38वां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ संपन्न, 199 मेधावियों को मिले पदक

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा— शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा है




मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का 38वां दीक्षांत समारोह बुधवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में विभिन्न संकायों के मेधावी छात्र-छात्राओं को 199 पदक प्रदान किए गए, जबकि 66,971 उपाधियों को डिजिलॉकर में सम्मिलित किया गया।

समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न भवनों का ऑनलाइन लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। साथ ही बुलंदशहर, हापुड़ और गाजियाबाद में बालिकाओं के एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जिला एवं पुलिस प्रशासन को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आंगनबाड़ी किट वितरित की तथा प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को पुस्तकें भेंट कीं।

75 प्रतिशत से अधिक पदक बेटियों के नाम

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष 75 प्रतिशत से अधिक पदक छात्राओं ने प्राप्त किए हैं, जो उनकी प्रतिभा, मेहनत और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान या डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए नशामुक्त भारत अभियान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

उन्होंने विश्वविद्यालय की 50 गांव गोद लेने की पहल, टीबी मुक्त भारत अभियान, नैक ए-प्लस ग्रेड, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, आधुनिक पुस्तकालय, शोध कार्यों और नवाचार आधारित शिक्षा की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को समय की मांग के अनुरूप रोजगारपरक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने चाहिए।

विकसित भारत के लिए तकनीक, अनुसंधान और नवाचार जरूरी

मुख्य अतिथि एवं इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT), हैदराबाद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु शुक्ला ने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना नई तकनीक, अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार के माध्यम से ही साकार होगा। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है और विद्यार्थियों को विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में निरंतर स्वयं को अद्यतन रखना चाहिए।

डिग्री समाज के प्रति उत्तरदायित्व का संकल्प

उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि डिग्री केवल एक प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है। उन्होंने नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अनुसंधान को युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का आधार बताते हुए भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व देने पर बल दिया।

रसीलाबेन डुंगरिया को मानद डी.लिट.

कच्छ की पारंपरिक हस्तकला को वैश्विक पहचान दिलाने, ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा भारतीय लोककला एवं हस्तशिल्प संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुश्री रसीलाबेन कांजीभाई डुंगरिया को विश्वविद्यालय की ओर से मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित किया गया।

कुलपति ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं नवाचार संबंधी उपलब्धियों के साथ भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 का कुलाधिपति स्वर्ण पदक एम.ए. (ड्राइंग एंड पेंटिंग) की छात्रा काजल को तथा डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक एलएलएम की छात्रा मुक्ता भारद्वाज को प्रदान किया गया। किसान ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार बीएससी कृषि की छात्राओं वर्णिका शर्मा और रूचि कुमारी को प्रदान किया गया।

समारोह में विधायक गुलाम मोहम्मद, एमएलसी श्रीचंद शर्मा, जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह, कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र सिंह, कार्यकारी परिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के डीन, शिक्षक, अधिकारी, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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