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Saturday, July 11, 2026

एमआईईटी में डीआरडीओ के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. के.पी. सिंह ने बौद्धिक संपदा अधिकार पर दी महत्वपूर्ण जानकारी

मेरठ। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) के आईपीआर सेल एवं इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के संयुक्त तत्वावधान में बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स-आईपीआर) विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डीआरडीओ के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. के.पी. सिंह मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि रहे।

डॉ. सिंह ने शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शोध कार्य के दौरान तैयार किया गया डेटा इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सुरक्षित रखने के बजाय ऑफलाइन सिस्टम में सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि शोध से संबंधित गोपनीय जानकारी लीक होने का खतरा न रहे। उन्होंने यह भी सलाह दी कि पेटेंट फाइलिंग के लिए किसी एजेंट से संपर्क करते समय शोध की संपूर्ण जानकारी प्रारंभिक चरण में साझा न करें। आवश्यक जानकारी केवल पेटेंट आवेदन तैयार होने के दौरान ही उपलब्ध कराएं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी शोध का स्तर उत्कृष्ट है और उसका सामाजिक या तकनीकी महत्व है, तो डीआरडीओ ऐसे नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए एक करोड़ रुपये से लेकर परियोजना की आवश्यकता के अनुसार कई करोड़ रुपये तक की रिसर्च ग्रांट उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

व्याख्यान के दौरान डॉ. सिंह ने बौद्धिक संपदा अधिकार के विभिन्न स्वरूपों की जानकारी देते हुए पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, इंडस्ट्रियल डिजाइन, ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) तथा सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट लेआउट डिजाइन जैसे प्रमुख आईपीआर संरक्षण तंत्रों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवाचारों की कानूनी सुरक्षा शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी स्वयं उनकी खोज।

इस अवसर पर कैंपस निदेशक डॉ संजय कुमार सिंह,प्रो डॉ प्रदीप पंत,डॉ गौरव गोयल, डॉ विजय कुमार शर्मा ,डॉ पंकज शर्मा,डॉ स्वाती शर्मा,रोहित अग्रवाल मौजूद रहे। 

कार्यक्रम का संचालन अंशिका चौधरी एवं आरती वर्मा ने किया।

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