देशभर से आए कवियों और साहित्यकारों को किया गया सम्मानित
मेरठ। हिन्दी दिवस के अवसर पर वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय एवं वीजीआई मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में “काव्य संगोष्ठी एवं साहित्य सम्मान समारोह–2025” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में देशभर से आए एक दर्जन से अधिक प्रख्यात कवियों और साहित्यकारों को शॉल, पटका और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि एवं हिन्दी सेवी, जुबिलेएन्ट फाउंडेशन के पेन इंडिया हेड विवेक प्रकाश, अंतर्राष्ट्रीय कवयित्री एवं विख्यात साहित्यकार डाॅ. मधु चतुर्वेदी, राजभाषा सम्मान से पुरस्कृत वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. यतीन्द्र कटारिया, डाॅ. गोपाल नारसन, वरिष्ठ शिक्षाविद डाॅ. भूपेश गुप्ता, डाॅ. अंजना व्यास समेत अनेक साहित्यकार इस अवसर पर मंचासीन रहे।
समारोह का शुभारंभ वेंक्टेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डाॅ. राजीव त्यागी, कुलपति प्रो. कृष्णकान्त दवे, मुख्य अतिथि विवेक प्रकाश, डाॅ. मधु चतुर्वेदी, डाॅ. यतीन्द्र कटारिया एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने रविन्द्रनाथ टैगोर सभागार में माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया।
इस अवसर पर समूह अध्यक्ष सुधीर गिरि ने कहा कि मातृभाषा में कामकाज और व्यापार कर शिखर पर पहुंचने वाले चीन और जापान दुनिया के सबसे बड़े उदाहरण हैं। हमें भी हिन्दी का सम्मान करते हुए हर काम हिन्दी में करने की परंपरा शुरू करनी चाहिए।
कवियों ने अपने ओजस्वी काव्य पाठ से उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। डाॅ. मधु चतुर्वेदी ने अपनी रचना “उम्र भर हमने ऐसे कसाले जिये, तम निगलते रहे पर उजाले दिये” सुनाकर सभागार को तालियों से गूंजा दिया। वहीं डाॅ. यतीन्द्र कटारिया ने हिन्दी की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा—
“सात समुन्दर पार है हिन्दी, भारत की जयकार है हिन्दी।”
डाॅ. राजीव त्यागी ने अपनी पंक्तियाँ—
“लोग कहते हैं कि तू अब भी खफा है मुझसे,
पर तेरी आँखों ने तो कुछ और ही कहा है मुझसे।”
सुनाकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
इसी तरह वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. गोपाल नारसन की रचना—
“शिकवा करने गये थे, इबादत सी हो गयी।
तुझे भूलने की जिद थी, पर तेरी आदत सी हो गयी।”
ने भी समां बांध दिया।
समारोह में डाॅ. अंजना व्यास, डाॅ. भूपेश गुप्ता, पीयूष पाण्डेय सहित अनेक साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने हिन्दी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में डाॅ. राजेश सिंह, डाॅ. नीतू पंवार, डाॅ. सुमन कुमारी, डाॅ. अंजलि भारद्वाज, डाॅ. आरती गुप्ता, डाॅ. स्मिता, डाॅ. विकास कुमार, डाॅ. श्रीराम गुप्ता, डाॅ. दर्पण कौशिक, डाॅ. आशुतोष गौतम, डाॅ. एस.एन. साहू, डाॅ. राजवर्द्धन, डाॅ. ओमप्रकाश, डाॅ. एस.के. श्रीवास्तव, डाॅ. अश्विन सक्सेना, डाॅ. मोहित शर्मा, डाॅ. ज्योति सिंह, डाॅ. योगेश्वर शर्मा, डाॅ. अनिल जायसवाल, दीक्षा, प्रशान्त, मारूफ चौधरी, अरुण गोस्वामी, एस.एस. बघेल, डाॅ. प्रताप सिंह समेत अनेक शिक्षाविद, शोधकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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