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Monday, December 22, 2025

बच्चों के हाथों में कलम, किताब और खेल—वैंकटेश्वरा से उठा “बाल विवाह मुक्त भारत” का संकल्प


मेरठ। जब नन्हे हाथों ने शपथ ली और सैकड़ों आँखों में भविष्य के सपने चमके, तब यह साफ हो गया कि बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वैंकटेश्वरा विश्वविद्यालय परिसर में बुधवार को “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान का शुभारम्भ केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला क्षण बन गया।

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुए इस 100 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया—क्या हम अपनी बेटियों को समय से पहले जिम्मेदारियों की बेड़ियों में जकड़ते रहेंगे, या उन्हें उड़ान भरने का अवसर देंगे?

इस अवसर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुरादाबाद सहित विभिन्न जिलों से आए 150 मेधावी बच्चों को इस अभियान का “ब्रांड एम्बेसडर” घोषित किया गया। ये वे बच्चे हैं, जिन्होंने मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा से पहचान बनाई है। इन्हीं बच्चों ने मंच से यह संदेश दिया कि बाल विवाह नहीं, शिक्षा ही असली संस्कार है।

कार्यक्रम के दौरान “बाल विवाह मुक्त भारत” जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और देश के महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया। बच्चों को संस्थान की ओर से शैक्षिक किट और पेन वितरित किए गए—मानो यह संदेश हो कि उनका असली अधिकार किताब और कलम है, न कि समय से पहले विवाह।

डा. सी.वी. रमन सभागार में आयोजित संगोष्ठी में संस्थापक अध्यक्ष श्री सुधीर गिरि ने बेहद भावुक शब्दों में कहा,

“यदि हमें सच में विकसित भारत चाहिए, तो बेटियों के हाथों में चूल्हा-चौका नहीं, बल्कि स्कूल बैग और खेल का सामान होना चाहिए। बच्चे, विशेषकर बेटियाँ, विकसित भारत की रीढ़ हैं।”


प्रतिकुलाधिपति डा. राजीव त्यागी ने बाल विवाह को राष्ट्रीय कलंक बताते हुए कहा कि इसका उन्मूलन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। जब तक समाज का हर व्यक्ति आगे आकर जागरूकता नहीं फैलाएगा, तब तक यह अभिशाप समाप्त नहीं होगा। हमें अंतिम व्यक्ति तक—अंत्योदय तक—पहुंचना होगा,” उन्होंने कहा।


कार्यक्रम में महिला कल्याण विभाग की केंद्र प्रबंधक ममता दुबे, वरिष्ठ परामर्शदात्री करुणानिधि, कुलपति प्रो. (डा.) कृष्णकांत दवे, कुलसचिव प्रो. (डा.) पीयूष पाण्डेय, पीआरओ डा. श्रीराम गुप्ता, निदेशक डा. प्रताप सिंह, मीडिया प्रभारी विश्वास राणा सहित अनेक शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


यह आयोजन एक संदेश छोड़ गया बाल विवाह केवल एक कुप्रथा नहीं, बल्कि सपनों की हत्या है।

और जब बच्चे खुद इसके खिलाफ आवाज़ उठाने लगें, तो समझिए भविष्य सुरक्षित हाथों में है।


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